मोतिहारी, मार्च 8 -- रक्सौल,एसं। बीते 5मार्च को संपन्न प्रतिनिधि सभा(सांसद) निर्वाचन के परिणामों ने मधेस की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर कर दिया है। दशकों तक मधेस की राजनीति पर पकड़ रखने वाले मधेसवादी दलों का चुनाव में पूरी तरह पत्ता साफ होता नजर आ रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि इस बार मधेस केंद्रित राजनीति का अंत हो गया है और उसकी जगह राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) ने अप्रत्याशित लहर पैदा कर दी है। संघीय गणतंत्र स्थापना के बाद वर्ष 2007/ 2008के मधेश आंदोलन के बाद राष्ट्रपति,उप राष्ट्रपति, उप प्रधानमंत्री देने वाले मधेशी दल और नेता संकट में है। निर्वाचन के ताजा आंकड़ों के अनुसार, बिहार से लगे नेपाल के मधेस प्रदेश की कुल 32 सीटों में से रास्वपा 30 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। इनमें से 9 सीटों पर पार्टी ने आधिकारिक रूप से ...
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