नई दिल्ली, मई 15 -- सुप्रीम कोर्ट ने 2003 के बहुचर्चित मधुमिता शुक्ला हत्याकांड के एक दोषी की समय पूर्व रिहाई के अनुरोध वाली याचिका को शुक्रवार को विचारार्थ स्वीकार कर लिया और कहा कि ध्यान सुधार पर होना चाहिए, न कि दंड देने पर। न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने गृह मंत्रालय का नौ जुलाई, 2025 का आदेश रद्द कर दिया। मंत्रालय ने दोषी रोहित चतुर्वेदी की समय पूर्व रिहाई के लिए उत्तराखंड सरकार की सिफारिश खारिज कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने गौर किया कि चतुर्वेदी ने बिना किसी छूट के 22 साल जेल में बिताए हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि अपराध एक बात है, सुधार दूसरी। यह भी पढ़ें- मधुमिता हत्या के दोषी की याचिका पर विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट ध्यान सुधार पर होना चाहिए, न कि दंड देने पर। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चतुर्वेदी पहले से...