नई दिल्ली, मई 15 -- सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 26 वर्षीय कवयित्री मधुमिता शुक्ला के 2003 के हत्याकांड के दोषियों में से एक की समय से पहले रिहाई की मांग वाली याचिका मंज़ूर कर ली। अदालत ने कहा कि किसी अपराध की प्रकृति ही माफी से इनकार करने का एकमात्र आधार नहीं हो सकती। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने गृह मंत्रालय के नौ जुलाई, 2025 के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें दोषी रोहित चतुर्वेदी की समय पूर्व रिहाई के लिए उत्तराखंड सरकार की सिफारिश खारिज कर दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने गौर किया कि चतुर्वेदी ने बिना किसी छूट के 22 साल जेल में बिताए हैं। यह भी पढ़ें- मधुमिता हत्याकांड के दोषी की सजा माफ : सुप्रीम कोर्ट अदालत ने फैसला सुनाते हुए टिप्पणी की, कि अपराध एक बात है, सुधार दूसरी। ध्यान सुधार पर होना चाहिए, न कि ...