मधुकरशाह ने अंग्रेजों के खिलाफ 1842 में भरी थी हुंकार
ललितपुर, अगस्त 10 -- ललितपुर,संवाददाता। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत भले ही इतिहास में 1857 से मानी जाती हो, लेकिन बुंदेलखंड की धरती पर इसके 15 वर्ष पहले ही अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह की चिंगारी भड़क चुकी थी। नाराहट के वीर योद्धा महावीर मधुकर शाह बुंदेला ने 8 अप्रैल 1842 को अंग्रेजों के खिलाफ हथियार उठाकर कई सैनिकों को मौत के घाट उतारा और अंतिम सांस तक विदेशी शासन से संघर्ष किया। महावीर मधुकर शाह बुंदेला के वंशज विक्रम शाह बुंदेला के मुताबिक वर्ष 1842 में होली के पारंपरिक उत्सव के दौरान नाराहट गढ़ी में बेड़नी नृत्य चल रहा था। सभी लोग पर्व मना रहे थे कि तभी अंग्रेजों के कुछ लोग उत्सव के बीच से बेड़नी को उठा ले गए थे। यह भी पढ़ें- बाबू कुंवर सिंह की तलाश में अंग्रेजों ने कैमूर में डाला था डेरा इस अपमान के बाद सभी बुंदेलों में आग ध...
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