देहरादून, सितम्बर 7 -- देहरादून। दून के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता खुर्शीद अहमद सिद्दीकी ने कहा कि उत्तराखंड में आवामी चंदे से स्थापित मदरसे अल्लाह की मिल्कियत हैं और संचालक शरई तौर पर इनके अमानतदार हैं। उन्होंने कहा कि नियमों के तहत मान्यता नहीं मिलने पर वैकल्पिक रूप से दीनी तालीम के लिए मकतब संचालित किए जा सकते हैं, जिनके लिए कानूनी मान्यता जरूरी नहीं है। उन्होंने कहा कि मान्यता न लेना, मदरसे का प्रयोजन बदलना या बीच सत्र में बच्चों का दाखिला लेने के बाद मदरसा बंद करना कानून और शरीयत के खिलाफ है। ऐसे कृत्यों से बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ होता है, जिसका जवाबदेही दुनिया और आखिरत में होगी। यह भी पढ़ें- बच्चों के भविष्य की खातिर मदरसे नियमों के तहत लें मान्यता : खुर्शीद

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