मतदाता बनने की राह में बढ़ी मुश्किल
नई दिल्ली, जुलाई 16 -- ओ पी रावत, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त भारत निर्वाचन आयोग ने फॉर्म-6 को लेकर जो नया बदलाव किया है, वह विवादों को न्योता दे सकता है। यह फॉर्म पहली बार मतदाता बनने वाले आवेदक भरते हैं, जिसमें अब माता-पिता से जुड़ी एसआईआर की जानकारी भी देनी होगी। इसके बिना उनका ऑनलाइन आवेदन स्वीकार्य नहीं होगा। आयोग का कहना है कि इससे मतदाता सूची अधिक पारदर्शी बन सकेगी। बेशक, यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि मतदाता सूची में कोई भी व्यक्ति बिना किसी 'प्रमाण' के शामिल न होने पाए और इसी का आधार विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को बनाया गया है, लेकिन बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए इस तरह का बदलाव चुनाव आयोग की छवि खराब कर सकता है। यहां 1982 का पारवूर (केरल) विधानसभा उप-चुनाव बतौर सबक याद किया जा सकता है। उस चुनाव में पहली बार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.