नई दिल्ली, दिसम्बर 4 -- नई दिल्ली। विशेष संवाददाता भारत के निर्वाचन आयोग (ईसीआई) द्वारा कराए जा रहे मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि मतदाता पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) को किसी वोटर की नागरिकता तय करने का कोई अधिकार नहीं है। शीर्ष अदालत को बताया गया कि ईसीआई द्वारा कराए जा रहे एसआईआर में नागरिकता तय करने के मामले में गंभीर प्रक्रियागत कमियां, पारदर्शिता की कमी और अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण हुआ है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने यह दलील दी है। मामले में बहस के चौथे दिन भूषण ने पीठ के समक्ष अलग-अलग फैसलों का जिक्र करते हुए, कहा कि 'कानूनी व संवैधानिक प्रावधानों से यह पूरी तरह स...