वाराणसी, नवम्बर 28 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। मणिकर्णिका घाट का अधूरा पुनर्विकास काशीवासियों ही नहीं बल्कि समस्त सनातनियों की भावना पर कुठाराघात जैसा है। शहर में हजारों करोड़ की योजनाएं चल रही हैं लेकिन मणिकर्णिका के पुनर्विकास के लिए धन का अभाव गंभीर मसला है। ये बातें समाजवादी युवजन सभा के प्रदेश महासचिव किशन दीक्षित ने कहीं। उन्होंने शुक्रवार को जारी बयान में कहा है कि 18 करोड़ की लागत से मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास का कार्य दो वर्ष पहले शुरू किया गया था। सीएसआर फंड से मिलने वाली रकम से इस काम को एक साल में पूरा किया जाना था। जानकारी मिली है कि फंड के अभाव में कार्यदायी संस्था रूपा फाउंडेशन ने हाथ खड़े कर दिए हैं। मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास का कार्य अधर में होने होने से शवयात्रियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्हों...
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