लखनऊ, जनवरी 25 -- केजीएमयू की ओर से मजारों को हटाने का नोटिस जारी किए जाने पर उलेमाओं ने रोष जताया है। रविवार को दरगाह शाहमीना शाह परिसर में उलेमाओं की बैठक हुई, जिसमें उलेमाओं ने बताया कि केजीएमयू में जो मजारें हैं वो केजीएमयू के बनने से पहले की है। मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि मजारों को हटाने से पहले केजीएमयू को कागज दिखाना चाहिए। मौलाना ने कहा कि वक्फ बोर्ड में दर्ज रिकार्ड को ही अंतिम माना जाता है। केजीएमयू स्थित मजार 15 वीं सदी से है। शाहमीना शाह के पीरजादा शेख नासिर अली ने कहा कि मजार पर हिन्दू-मुसलमान के साथ हर समुदाय के लोगों की आस्था है। 1912 में केजीएमयू की स्थापना हुई तो नुजूल विभाग द्वारा दरगाह और मजारों तथा केजीएमयू परिसर की भूमि को चौहद्दीकरण कर अलग-अलग कर दिया गया। बावजूद इसके केजीएमयू द्वारा 26 अप्रैल 2025 को मनमाने तरीके स...
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