लखनऊ, जनवरी 8 -- दिलदार अली गुफरान मआब फाउंडेशन के तत्वावधान में अकबरी गेट स्थित हुसैनिया जन्नत मआब सैय्यद तकी साहब में मुजद्दिद-ए-शरीयत आयतुल्लाह अल-उजमा सैय्यद दिलदार अली नकवी की याद में एक इल्मी व अदबी कार्यक्रम 'मजलिस-ए-देसा' का आयोजन किया गया। नासिर द्वारा कुरआन की तिलावत से कार्यक्रम की शुरूआत के बाद जफर बनारसी और मौलाना रहबर अस्करी ने नजराना-ए-अकीदत पेश की। मौलाना मुस्तफा अली खान ने खिताब करते हुए कहा कि तालीम एक ऐसी नेमत है, जो इंसान को इज़्जत और बुलंदी अता करती है, लेकिन वह तभी फायदेमंद होती है, जब अमल भी जुड़ा हो। तालीम को सम्मान इसलिए हासिल है, क्योंकि वह इंसान को तकवा और परहेजगारी की राह तक पहुंचाती है। मौलाना ने कहा कि हजरत गुफरान मआब ने भारतीय उपमहाद्वीप में शरीयत अदालतों की स्थापना, जुमे व जमाअत की नमाज के प्रबंध और अजादारी...
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