भभुआ, अप्रैल 11 -- किसान जगरोपन सिंह ने बताया कि पहले समय पर बारिश होती और नहर में पानी आ जाता था, तब सिंचाई पर खर्च नहीं होता था। अब मोटर, डीजल पंप, समरसेबल चलाकर सिंचाई कर रहे हैं। 200 रुपया घंटा पानी पर खर्च करना पड़ रहा है। पहले 200 रुपए मजदूरी लगती थी और 300-350 रुपए ले रहे हैं। जलवायु परिवर्तन की वजह से कीटनाशक दवा व खाद पर खर्च 1000 रुपया प्रति एकड़ खर्च बढ़ गया है। पहले गोबर व घुर फेंककर खाद की जरूरत पूरी कर लेते थे। कीटनाशक दवा की भी जरूरत नहीं पड़ती थी। कोट जलवायु परिवर्तन का असर खेतीबारी पर पड़ा है। इससे होनेवाली क्षति को रोकने या कम करने के लिए सरकार का जलवायु अनुकूल और प्राकृतिक खेती करने पर जोर है। प्राकृतिक खेती को ले दो दिन पहले झारखंड व बिहार के कृषि वैज्ञानिकों की कार्यशाला कैमूर में हुई थी, जिसमें कई मुद्दों पर चर्च हुई है। ...
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