दरभंगा, अगस्त 7 -- राजीव रंजन प्रसाद,दरभंगा। मखाना की खेती आर्थिक दृष्टि से अत्यंत लाभकारी है, लेकिन इसका विस्तार केवल वहीं किया जाना चाहिए जहां पर्याप्त सतही जल संसाधन उपलब्ध हों। भूजल के अत्यधिक दोहन पर आधारित मखाना खेती भविष्य में पेयजल संकट बढ़ा सकती है। ये बातें राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार ने असम के ग्वालपाड़ा जिले की कल्याणपुर पंचायत के 50 किसानों तथा कृषि विज्ञान केंद्र, परसौनी (पूर्वी चंपारण) के 50 किसानों के लिए आयोजित ऑनलाइन वैज्ञानिक प्रशिक्षण कार्यक्रम में कही। उन्होंने मखाना उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और निर्यात तक की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी दी। कहा कि इससे पूर्व भी असम के छह जिलों के किसानों को राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र में प्रशिक्षण द...