बलिया, सितम्बर 27 -- बलिया, संवाददाता। जिले में जलभराव वाले खेतों को आबाद करने में मखाना की खेती किसानों के लिए नगदी फसल के रूप में नया विकल्प बनेगी। इस दिशा में उद्यान विभाग ने पहल शुरू कर दिया है। विभाग के विशेषज्ञों के साथ प्रगतिशील किसानों की टीम 12 अक्तूबर को राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र दरभंगा (बिहार) के लिए रवाना होगी। विभागीय खर्च पर वहां चार दिवसीय कार्यशाला में विशेषज्ञ और किसान मखाना की खेती, उत्पादन और देख-रेख, फसल तैयार होने पर कटाई और भंडारण का प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।तीन तरफ से गंगा, सरयू समेत अन्य नदियों से तीन तरफ से घिरा होने से जनपद में निचली जमीन (दियारा, डूब क्षेत्र) का क्षेत्रफल अनुमानित लगभग डेढ़ लाख हेक्टेयर है। इसमें कुछ क्षेत्रफल में एक फसली खेती होती है, बाकी की जमीन अधिकांशत: बेकार रहता है। इधर, प्रगतिशील औ...