खगडि़या, अप्रैल 18 -- खगड़िया। हिन्दुस्तान टीम मक्के का कटोरा कहे जाने वाले खगड़िया जिले में अब बदलाव की एक नई इबारत लिखी जा रही है। यहां के किसान अपनी पारंपरिक खेती के ढर्रे को छोड़कर जलजमाव वाली परित्यक्त भूमि पर 'सफेद सोना यानि मखाना उपजाकर न केवल अपनी तकदीर बदल रहे हैं, बल्कि पूरे इलाके की तस्वीर को भी नया रूप दे रहे हैं। कभी जो खेत बाढ़ और बारिश के पानी में डूबकर बेकार पड़े रहते थेञ आज वे पसराहा के सोनडीहा चौर बहियार के किसानों के लिए कुबेर का खजाना साबित हो रहे हैं। अकेले इस चौर बहियार के लगभग के 250 से 300 एकड़ जलमग्न क्षेत्र में मखाने की लहलहाती फसल क्षेत्र की खुशहाली का प्रतीक बन गई है। यह भी पढ़ें- मखाना खेती से जुड़कर किसानों को रही है अच्छी आमदनी जहां दो दर्जन से अधिक किसान सामूहिक रूप से इस स्वर्ण क्रांति के नायक बनकर उभरे हैं। दूसर...
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