गंगापार, मार्च 2 -- माह-ए-रमजान के दूसरे अशरे की रौनक के साथ कस्बा भारतगंज में इबादतों का सिलसिला जारी है। रविवार को रोजेदारों ने जहां दस रोज़े मुकम्मल किए, वहीं कस्बे की मक्का मस्जिद (डेरा वाली मस्जिद) में 11 दिन की तरावीह मुकम्मल होने पर खास रौनक देखने को मिली। परिसर में शाम को रोज़ा इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में रोजेदारों ने शिरकत की। तरावीह की नमाज हाफिज आसिफ रजा बनारसी ने मुकम्मल कराई। तरावीह पूरी होने पर नमाजियों ने उन्हें फूल-मालाएं पहनाकर इस्तकबाल किया। बाद तरावीह जलसे में दीन-ओ-दुनिया की बातें और नातिया अशआर पेश किए गए। शायर असगर रज़ा इलाहाबादी ने जब पढ़ा, ख़ुदा भी मान जाता है, नबी के मान जाने से" तो पूरा माहौल गूंज उठा। वहीं शायर मुख्तार ने अपने कलाम "इश्क-ए-नबी में जो कर दे जा'' कुर्बान, यही मोमिन की ह...
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