किशनगंज, अप्रैल 14 -- बहादुरगंज। निज संवाददाता अस्सी के दशक में जूट की कीमत चार सौ रुपये मन पहुंच जाने से जूट किसानों को कलांतर के वर्षों में संतोषजनक लाभ मिला था। आज भी क्षेत्र के किसानों में रफीक आलम,अशोक सिंह आदि अस्सी के दशक को जूट किसानों के लिए स्वर्णिम काल मानकर उस पल को स्मरण कर मायुस हो जाते हैं। पाट का अस्सी के दशक से लेकर लंबे कालखंड तक पाट का समर्थन मुल्य खेती लागत के अनुरूप नहीं रहने के बावत क्षेत्र के किसान पाट, गेहूं की खेती को घाटे की खेती मानकर विमुख होकर मक्का की खेती को विगत दो दशक से दूसरा प्रमुख उत्पादक फसल मानकर खेती को तवज्जो देने के बाद क्षेत्र के किसानों के आर्थिक हालात में व्यापक सुधार आया हैमक्का की खेती के लिए मिट्टी और जलवायु अनुकूलक्षेत्रीय किसानों द्वारा दशकों पहले पाट और गेहूं की खेती से विमुख होकर मक्का की...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.