नई दिल्ली, फरवरी 24 -- मकान की नींव में चांदी के नाग-नागिन और कलश गाड़े जाने के पीछे पौराणिक मान्यता है। इसके अनुसार पृथ्वी शेषनाग के फण पर टिकी है। घर की मजबूती, रक्षा, स्थिरता और सुख-समृद्धि के लिए शेषनाग और भगवान विष्णु (कलश) को प्रसन्न करने के लिए भूमि पूजन की परंपरा है। यह नकारात्मक ऊर्जा और वास्तु दोष को दूर करती है।पाताल लोक से जुड़ा है श्रीमद्भागवत महापुराण के पांचवें स्कंद के अनुसार पृथ्वी के नीचे पाताल लोक है। इसके स्वामी शेषनाग हैं। भूमि से दस हजार योजन नीचे अतल, अतल से दस हजार योजन नीचे वितल, उससे दस हजार योजन नीचे सतल, इसी क्रम से सब लोक स्थित हैं। अतल, वितल, सतल, तलातल, महातल, रसातल, पाताल ये सातों लोक पाताल स्वर्ग कहलाते हैं। इनमें भी काम, भोग, ऐश्वर्य, आनंद, विभूति ये वर्तमान हैं। यहां दैत्य, दानव, नाग आनंदपूर्वक भोग-विलास...
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