मंदिर से आशा
नई दिल्ली, सितम्बर 3 -- भारत में धर्मस्थलों की चर्चा सदा प्रासंगिक बनी रहती है। जहां अयोध्या राम मंदिर के संचालन के लिए नई टीम गठित हो गई है, वहीं पुरी जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की गणना सबका ध्यान खींच रही है। यह सुखद इसलिए है कि गणना 48 साल बाद हुई है। भारत के जो चार धाम हैं, उनमें जगन्नाथ धाम की संपन्नता कतई चकित नहीं करती है। 12वीं शताब्दी के इस पावन मंदिर का संचालन श्री जगन्नाथ मंदिर अधिनियम, 1955 के तहत ओडिशा सरकार करती आई है। अब तक सामने आए आंकड़ों के अनुसार, मंदिर के पास 1,912 करोड़ रुपये की बैंक जमा राशि है और देश भर में 60,821 एकड़ भूमि है। इसके अलावा, इसके रत्न भंडार में सोने, हीरे के आभूषण भी हैं, जिनके मूल्य जानने के लिए गणना हुई है। इस मंदिर की भारी आय के मुख्य स्रोत भक्तों के दान, मंदिर के स्वामित्व वाली खदानों से होने वाल...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.