लखनऊ, जून 18 -- मंगल देव गिरि/बलरामपुर। उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के सुदूर पचपेड़वा ब्लॉक से एक ऐसी प्रेरणादायी कहानी सामने आई है, जो साबित करती है कि हुनर और हौसले के आगे कोई भी बाधा टिक नहीं सकती। यहां की बेटी गायत्री श्रीवास्तव ने अपने बचपन के चित्रकारी के शौक को आत्मनिर्भरता के एक सशक्त माध्यम में बदल दिया है। मंडला पेंटिंग की बारीकियों को साधकर उन्होंने न केवल अपना मुकाम बनाया, बल्कि गांव की सौ से अधिक महिलाओं को रोजगार की नई राह भी दिखाई है। शौक से शुरू हुआ, व्यवसाय पर आकर ठहराशौक का सफर गायत्री बताती हैं कि स्कूल से लेकर कॉलेज तक पेंटिंग उनका स्वाभाविक साथी रही। विवाह के बाद घर-परिवार की जिम्मेदारियों के बीच भी उन्होंने अपनी कला को जीवित रखा। धीरे-धीरे उन्होंने मंडला पेंटिंग की जटिल ज्यामितीय शैली में दक्षता हासिल की और इसे व्य...