मंजूषा कला के मूल स्वरूप और डिजाइन की संभावनाओं पर मंथन
भागलपुर, जून 19 -- नाथनगर, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि । अंग क्षेत्र की प्रसिद्ध लोककला मंजूषा के मूल स्वरूप, पारंपरिक रंग-विन्यास और आधुनिक डिजाइन संभावनाओं को लेकर चंपानगर में मंथन किया गया। अमेठी यूनिवर्सिटी, छत्तीसगढ़ के फैशन टेक्नोलॉजी विभाग के प्रोफेसर राजीव कुमार ने मंजूषा कला के अध्ययन एवं शोध के सिलसिले में मंजूषा साधक एवं शोधकर्ता हेमंत कुमार तथा साहित्यकार, नाटककार और मंजूषा विशेषज्ञ आलोक कुमार से विस्तृत चर्चा की। बैठक के दौरान मंजूषा कला की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, पारंपरिक स्वरूप, प्रतीकों, रेखांकन शैली तथा मूल पंचरंगीय रंग-संयोजन पर विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि मंजूषा कला में प्रयुक्त पांच पारंपरिक रंगों का सांस्कृतिक, धार्मिक और प्रतीकात्मक महत्व अत्यंत गहरा है, जो इसकी विशिष्ट पहचान को स्थापित करता है। प्रोफेसर राजी...
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