मैनपुरी, मई 1 -- भोगांव। अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पर एक बार फिर मंचों से श्रमिकों के सम्मान में भारी-भरकम भाषण गूंजे, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी बेबसी और अभावों से भरी है। ई-श्रम पोर्टल से लेकर मनरेगा तक, सरकारी योजनाओं का बड़ा पुलिंदा तो है, लेकिन आम मजदूर के लिए ये केवल कागजी साबित हो रहे हैं। मंचों पर होने वाली मजदूर वंदना के बीच इन श्रमिकों की दो वक्त की रोटी की जद्दोजहद जारी है। कस्बे के जामा मस्जिद और जगतनगर चौराहे पर सजने वाली मजदूर मंडी में प्रतिदिन दर्जनों श्रमिक काम की उम्मीद में लाइन लगाते हैं। घंटों इंतजार के बाद कई बार उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है। राजमिस्त्री मुकेश बताते हैं कि हुनर होने के बावजूद सप्ताह में केवल तीन दिन काम मिलता है, बाकी दिन परिवार के भरण-पोषण की चिंता में गुजरते हैं। वहीं शमशाद का कहना है कि मजदूरी में भी अ...