एटा, मार्च 19 -- किशाोरी के परिजनों की ओर से दायर आवेदन में अधिवक्ता अभिषेक शर्मा ने कहा उक्त गर्भावस्था एक जघन्य अपराध का परिणाम है और पीड़िता न तो शारीरिक रूप से परिपक्व है और न ही गर्भ को पूर्ण अवधि तक धारण करने में सक्षम है। इसलिए, न्याय के हित में और पीड़िता के गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार की रक्षा के लिए उक्त गर्भ को समाप्त करना अत्यंत आवश्यक है। पीड़िता की उम्र का परीक्षण कराया गया तो उसकी उम्र 15 से 16 वर्ष के बीच निकली। पीड़िता के अधिवक्ता ने पीड़िता के लिए न्याय की मांग की। अपर जिला जज नरेंद्र पाल सिंह राणा ने बहस सुनने के बाद निर्णय सुनाया। इसमें चीफ मेडिकल ऑफिसर को निर्देशित किया कि वह पीड़िता की प्रेग्नेंसी के मेडिकल टर्मिनेशन के लिए जरूरी कानूनी कार्रवाई करें। सीएमओ को खास तौर पर निर्देश दिया कि वो यह पक्का करें कि अबॉर्ट किए ग...