नई दिल्ली, मार्च 16 -- सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक याचिका में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। याचिका में भोपाल गैस त्रासदी से संबंधित जले हुए कचरे से पारे के संभावित रिसाव के कारण भूमि और भूजल के प्रदूषण का खतरा होने का आरोप लगाया गया है। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने 'भोपाल गैस पीड़ित संघर्ष सहयोग समिति' से कहा कि वह मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का रुख करे, जो पिछले तीन दशकों से पुनर्वास और संबंधित मुद्दों की निगरानी कर रहा है। पीठ ने पीड़ितों के संगठन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर की दलीलों पर गौर किया और कहा कि हाईकोर्ट इस याचिका पर शीघ्रता से विचार करेगा। दिसंबर 1984 में भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड कॉरपोरेशन के कीटनाशक संयंत्र से 40 टन से अधिक मिथाइल आइसोसायनेट गैस का रिसाव हुआ था। इ...
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