जमशेदपुर, जून 11 -- भोपाल गैस त्रासदी के दौरान 1984 में गैस के कारण चांडिल निवासी 15 वर्षीय मधुसूदन के आंखों की रोशनी चली गई थी। उस समय वे भोपाल में भवन निर्माण में तकनीशियन का काम करते थे। आंखों की रोशनी जाने से उन्हें काम छोड़कर जमशेदपुर आना पड़ा। 23 साल बाद उनकी रोशनी लौट आई है। 2007 में रोशनी संस्था के परविंदर सिंह का उन्हें फोन आया कि उनके लिए कॉर्निया मिल गया है और वह आकर लगवा लें। उनके खुशी का ठिकाना न रहा। वे जमशेदपुर आई हॉस्पिटल पहुंचे और बिना किसी खर्च के कॉर्निया लगवा लिया। इसके बाद रोशनी लौट आई। वे आज 55 वर्ष के हैं और फिर से भोपाल में काम कर रहे हैं। उनके अलावा अमर कुमार की भी पांच वर्ष की उम्र में तबीयत बिगड़ने के बाद एक आंख की रोशनी चली गई थी। करीब 20 साल बाद 2012 में उनका भी कॉर्निया बदला गया, जिससे आंख की रोशनी लौट आई। रो...