इंदौर, मई 17 -- मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा भोजशाला को वाग्देवी मंदिर मानने के फैसले से आंदोलनकारियों में भारी खुशी है। इस आंदोलन से जुड़े 95 वर्षीय योद्धा विमल गोधा और अशोक जैन ने अपने पुराने संघर्षों को याद किया। उन्होंने बताया कि कैसे 1993 से 2003 के बीच पुलिस लाठीचार्ज, गिरफ्तारियों और पाबंदियों के बावजूद उन्होंने संघर्ष जारी रखा। 11वीं सदी में राजा भोज द्वारा निर्मित यह स्थल संस्कृत शिक्षा और मां सरस्वती का केंद्र था जो बाद में विवादित हो गया। वर्तमान में कानूनी लड़ाई जीतने के बाद अब आंदोलनकारियों का मुख्य लक्ष्य लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम से मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा को वापस भारत लाना है।पांचवीं कक्षा से भोजशाला से जुड़ाव 95 वर्षीय विमल गोधा की आंखों में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच के फैसले को लेकर अलग ही चमक दिखाई दी। उन्हों...