भोजन में लोकतांत्रिक हो रहा समाज
नई दिल्ली, अक्टूबर 5 -- विभूति नारायण राय,पूर्व कुलपति व साहित्यकार समाज में मूल्यों के स्तर पर परिवर्तन इतनी धीमी गति से होते हैं कि कई बार उनको पकड़ पाना बहुत मुश्किल होता है। धर्म, राज्य, सुशासन और विवाह ऐसी ही कुछ संस्थाएं हैं, जो मनुष्य की संज्ञानात्मक क्षमताओं में वृद्धि के साथ इस कदर बदली हैं कि कुछ शताब्दी पहले के हमारे पूर्वज आज इस धरा पर वापस आएं, तो पहचान भी नहीं पाएंगे। शृंखला परिवर्तन या 'डॉमिनो इफेक्ट' में तब्दील होकर ये बदलाव इतनी तेज भी हो सकते हैं कि हमारे कदमों के नीचे की जमीन कांपती सी महसूस हो। पिछले कुछ दिनों से मेरी नजर ऐसे ही एक परिवर्तन पर टिकी हुई है, जो हमारी खान-पान की आदतों से जुड़ा है। बिना इस खामखयाली के कि मैं समाजशास्त्र का कोई गंभीर अध्येता हूं, अपने समय और समाज के एक सामान्य, किंतु सजग अवलोकनकर्ता की हैसि...
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