गोंडा, अप्रैल 21 -- बालपुर, संवाददाता। मनुष्य जीवन केवल भोग के लिए नहीं, बल्कि आत्मज्ञान के लिए मिला है। इंद्रियों और बुद्धि के मोह में फँसकर हम अपनी असली पहचान भूल जाते हैं। समय निरंतर कम हो रहा है इसका सही उपयोग आवश्यक है। परमात्मा हमेशा हमारे साथ है, बस उसे पहचानने की आवश्यकता है। यह बातें ग्राम पंचायत लक्ष्मनपुर जाट के मजरे नटिन जोत में विंदेश्वरी प्रसाद मिश्रा के यहां आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में श्रोताओं को संबोधित करते हुए कथा व्यास आचार्य चंद्रभान तिवारी ने कही। उन्होंने कहा कि पुरंजन नाम का एक राजा अपने लिए एक आदर्श निवास की तलाश में पूरी पृथ्वी पर भटक रहा था। लंबी खोज के बाद उसे एक अद्भुत नगर मिला। नौ द्वारों वाला, अत्यंत सुंदर और सभी सुख-सुविधाओं से युक्त जो "नौ द्वारों वाला नगर" वास्तव में मानव शरीर का प्रतीक माना गय...
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