भोगों से बचकर ज्ञान और आत्मशुद्धि की ओर बढ़ें-नरेश मुनि
शामली, सितम्बर 25 -- शामली। शहर के श्री श्वेतांबर जैन स्थानक मंदिर में चल रहे चातुर्मास के दौरान संघ संचालक नरेश मुनि गुरुदेव ने दश लक्षण धर्म के दसवें एवं अंतिम धर्म उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि कामवासना और विषयों का त्याग कर आत्मा में लीन होना ही वास्तविक उत्तम ब्रह्मेचर्य है। उन्होंने कहा कि मन, वचन और शरीर से कामवासना का परित्याग कर अपनी शुद्ध आत्मा में लीन होना ब्रह्मचर्य धर्म का उद्देश्य है। अनंत चतुर्दशी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने श्रावक-श्राविकाओं से आत्मा को अधिक से अधिक पवित्र बनाने और ज्ञान, दर्शन एवं चरित्र के विकास की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया। यह भी पढ़ें- इंद्रियों पर संयम से आत्मशुद्धि की ओर बढ़ना ही उत्तम ब्रह्मचर्य नरेश मुनि ने कहा कि मनुष्य जीवन बड़ी कठिनाई से प्राप्त होता है। त...
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