मुजफ्फरपुर, फरवरी 14 -- मुजफ्फरपुर, हिप्र। परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश पीयूष प्रभाकर ने कहा है कि राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए भूमि अधिग्रहण के विवादों को सीधे हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में ले जाना अनावश्यक समय की बर्बादी है। हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है कि भूमि अधिग्रहण विवाद के मामले को पहले निचले स्तरों पर निष्पादन कराने का प्रयास किया जाना चाहिए। सक्षम पदाधिकारी की ओर से तय मुआवजे से असंतुष्ट होने पर आरबिट्रेटर या प्रमंडलीय आयुक्त के यहां वाद दायर करना चाहिए। वहां के निर्णय से असंतुष्ट होने पर जिला न्यायाधीश के समक्ष चुनौती दी जा सकती है। जिला न्यायाधीश के फैसले से असंतुष्ट होने पर हाईकोर्ट में अपील दायर की सा सकती है। हाईकोर्ट के फैसले से असंतुष्ट होने पर अंतिम व विशेष उपाय के तौर पर सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति या...