धनबाद, अप्रैल 5 -- बीसीसीएल क्षेत्र में भूमिगत आग एवं भू-धंसान का दायरा बेशक घट रहा है, लेकिन आबादी वाले इलाकों में अभी स्थिति खतरनाक बनी हुई है। झरिया पुनर्वास से जुड़े आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि गैर आबादी वाले भूमिगत आग प्रभावित क्षेत्रों में कोयला खनन के लिए फायर फाइटिंग प्रोजेक्ट चलाए जाने से भूमिगत आग प्रभावित क्षेत्रों में कमी आई है। आबादी वाले क्षेत्रों में फायर फाइटिंग प्रोजेक्ट नहीं चल पाने के कारण स्थिति खतरनाक है। उदाहरण स्वरूप हाल में केंदुआडीह और सोनारडीह की घटना को ले सकते हैं। एक जगह गैस रिसाव से कई की जान गई तो दूसरी तरफ भू-धंसान में तीन की मौत हुई। भू-धंसान की एक वजह अवैध खनन भी है। कोयले के अवैध खनन के कारण पता ही नहीं चलता कि सुरंग कहां तक है, कितनी जमीन खोखली हुई है। कोयला चोर पिलर तक काट देते हैं, जिसपर जमीन टिकी रहत...
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