धनबाद, फरवरी 16 -- धनबाद, वरीय संवाददाता मेरे सर पे आसमां सा बाबा तेरा हाथ मेरे लिए तो सबसे पहले मेरे भेलेनाथ ... भांग धतूर कइले बियाह, भोला बारात लेइ अइले नारद मुनि भइले अगुआ, बियाह करइले..., गौरि हरे गिरिजा हरे, सखी भसुर भयल बियाह, गल में सपोली, सिर जटा के जंजाल, मेना रानी चकित भइली, देखि कें भसुर के हाल... महाशिरात्रि पर रविवार को कुछ ऐसे ही गीतों पर नाचते-गाते भूत प्रेत, नंदी पर सवार महादेव तो कहीं डीजे पर नाचते बाराती। भूत-प्रेत के रूप व शेर, भालू का रूप धरे बीच सड़क पर तांडव करते शिवभक्त। फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि और महालक्ष्मी योग, सर्वार्थ सिद्धि और चतुर्ग्रही योग जैसे दुर्लभ संयोग पर रविवार को जब महादेव की बारात निकली तो देखने वालों का हुजूम उमड़ पड़ा। सुबह से लेकर देर रात तक शिव भक्ति का ऐसा उल्लास की मानों पूरा शह...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.