सिद्धार्थ, मार्च 30 -- इटवा/सोहना, हिन्दुस्तान संवाद। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब आम लोगों की जिंदगी पर साफ दिखने लगा है। ईंधन संकट और गैस सिलेंडर की किल्लत ने शहरों में काम करने वाले कामगारों की कमर तोड़ दी है। कामकाज ठप होने और बढ़ती महंगाई ने उन्हें ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां रोजी-रोटी बचाना भी मुश्किल हो गया। मजबूरी में अब वे शहरों से पलायन कर अपने गांव लौट रहे हैं। हाल ही में नावडीह गांव के राकेश कुमार भारती भी इसी संकट की मार झेलकर पुणे से लौटे हैं। वे एक निजी कंपनी में काम करते थे, लेकिन गैस की कमी ने सब कुछ बिगाड़ दिया। राकेश बताते हैं कि हालात ऐसे हो गए थे कि न खाना बन पा रहा था और न ही काम सुचारू रूप से चल पा रहा था। रोज कमाकर खाने वाले के लिए यह स्थिति किसी बड़े संकट से कम नहीं थी। डर और अनिश्चिता के बीच उन्होंने ...
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