पाकुड़, मार्च 9 -- लिट्टीपाड़ा। प्रखंड के अधिकांश गांवों में हर साल की तरह इस बार भी जल संकट गहराने लगा है। गर्मी की आहट के साथ ही ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। वर्षों पहले प्रखंड क्षेत्र में करीब 217 करोड़ रुपये की लागत से जलापूर्ति योजना शुरू की गई थी, लेकिन आज तक यह योजना पूरी नहीं हो सकी है। योजना अधूरी रहने के कारण ग्रामीणों को अब भी पेयजल के लिए कुएं, चापाकल और दूर-दराज के जलस्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी के दिनों में कई चापाकल सूख जाते हैं, जिससे पानी की समस्या और गंभीर हो जाती है। खासकर पहाड़ी और दूरस्थ गांवों में लोगों को रोजाना कई किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ता है। महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है। स्थानीय लोगों ने बताया कि जलापूर्ति योजना के तहत पाइपलाइन बिछाने और जलमीनार...
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