नई दिल्ली, मई 11 -- बहार दत्त,पत्रकार व पर्यावरणविद आईआईटी बॉम्बे के एक हालिया अध्ययन से पता चला है कि उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में लू मुख्यत: स्थानीय कारकों से आती है, न कि कहीं और से आने वाली गर्म हवाओं के कारण। 'स्प्रिंगर नेचर रिसर्च' में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन बताता है कि मिट्टी की नमी, बादल छाने और आर्द्रता जैसी स्थानीय मौसमी परिस्थितियां लू की तीव्रता व अवधि बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती हैं। इसका अर्थ है, चरम गर्मी पैदा करने में क्षेत्रीय या जलवायु परिवर्तन जैसी बड़ी मौसमी क्रियाओं से अधिक स्थानीय कारक प्रभावी हो सकते हैं। ऐसे में, स्थानीय स्तर पर किए गए सरल उपाय नागरिकों को चरम मौसमी घटनाओं से तत्काल राहत दे सकते हैं। हमारे लिए अच्छी बात यह है कि भारत उन चंद देशों में शुमार है, जिसके पास 100 से अधिक शहरों के लिए 'हीट एक्शन प्ला...