भीड़ में मौजूदगी से दंगा करने का दोष साबित नहीं होता : कोर्ट
नई दिल्ली, अगस्त 19 -- नई दिल्ली। भारत बंद के दौरान दंगा करने, सड़क जाम करने और डीटीसी बसों के टायरों की हवा निकालने के 16 साल पुराने मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने पूर्व पार्षद विनोद कुमार मोंगा और राम सेवक को बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ भीड़ का हिस्सा होना किसी व्यक्ति को दंगे या भीड़ के दूसरे कथित कृत्यों के लिए दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है। अभियोजन पक्ष को यह साबित करना होगा कि आरोपी गैरकानूनी जमावड़े का हिस्सा था और उसके साझा उद्देश्य में शामिल था। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी प्रेरणा राय की अदालत ने फैसले में कहा कि अभियोजन आरोपियों की पहचान और उनकी भूमिका को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। फैसले में कोर्ट ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अभिव्यक्ति के अधिकार को भी रेखांकित किया। सुप्रीम कोर्ट के रामलीला मैदान मामल...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.