ग्वालियर, नवम्बर 7 -- सरकारी अधिकारियों की लापरवाही पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कर्मचारी के पक्ष में आए फैसले को चुनौती देने के लिए 329 दिन की देरी से रिट अपील दायर करना अधिकारियों को भारी पड़ गया। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने प्रभारी अधिकारी और ग्वालियर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एमएस सागर पर कुल 3 लाख रुपए की कॉस्ट लगा दी है। अदालत ने साफ कहा है कि जुर्माने की रकम सरकारी खजाने से नहीं, बल्कि संबंधित अधिकारियों को अपनी जेब से जमा करनी होगी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। देरी माफ करने के लिए शासन की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण को अदालत ने संतोषजनक नहीं माना। तल्ख टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि अपील खारिज कराने की ही सेटिंग थी। अदालत को आशंका है...