नई दिल्ली, मई 7 -- नई दिल्ली। प्रमुख संवाददाता दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि सड़कों व भवनों के नाम बदलना ही काफी नहीं है, इसके लिए सबसे बड़ा काम भारत के मनों को बदलना है। प्रो. योगेश सिंह दिल्ली विश्वविद्यालय के सर शंकर लाल हाल में डॉ. प्रशांत बर्थवाल द्वारा लिखित पुस्तक डीकोलोनिजिंग दा भारतीय माइंड्स: फ्रॉम कोलोनियल रूट्स टू कल्चरल मर्क्सिस्म के विमोचन अवसर पर कही। उन्होंने कहा कि पुस्तकें मनों पर प्रभाव डालती हैं। भारत की 800 साल की गुलामी में भी हमारी संस्कृति और संस्कार खत्म नहीं हुए, लेकिन वह कमजोर जरूर हुए हैं। भारत के मंदिरों को तोड़ा गया, पुस्तकालयों को जलाया गया, भारत के मनों को तोड़ा गया और मनोबल गिराया गया इसलिए मनों पर काम करना जरूरी है। यह भी पढ़ें- भारत के मनों को बदलने पर हो काम: प्रो. योगेश सिंह यह ...