नई दिल्ली, अप्रैल 4 -- अरविंद सिंह नई दिल्ली। हिमालय की गोद में भारत की सीमावर्ती रेल-रोड सुरंगें महज आवागमन का रास्ता भर नहीं हैं, युद्धकाल में ये भूमिगत बंकर के रूप में काम करेंगे। जम्मू-कश्मीर, लेह-लद्दाख से लेकर पूर्वोत्तर के ये अभेद्य किले युद्ध की बाजी पलटने की क्षमता रखते हैं। यहां सुरक्षित वार-रूम, मिसाइल स्टोर करने के गुप्त चैंबर, पास की सड़कों पर टेकऑफ-लैंडिंग सहित जेट फाइटर्स विमानों के सुरंगों में छिपने के ठिकाने हैं। इन जीवनदायी सुरंगों को बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल एवं न्यूक्लियर हमलों को झेलने के लिए डिजाइन किया गया है। जहां हजारों सैनिक एवं आम जनता महीनों तक सुरक्षित रह सकते हैं।केंद्र सरकार ने दूरगामी रणनीतिक और सामरिक नीति के तहत देश की सीमाओं पर रेलवे और सड़क सुरंगें केवल यातायात साधन के लिए नहीं बल्कि भूमिगत बेस के रूप म...
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