गोड्डा, नवम्बर 14 -- पथरगामा। पथरगामा दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित चल रही शिव कथा के तीसरे दिन पंडित रविशंकर ठाकुर जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान शिव की समाधि को भंग करने के लिए कामदेव जी गए थे। यह प्रसंग केवल एक कथा नहीं, बल्कि एक गहरा संदेश है कि जब कोई व्यक्ति अपने अधिकार का दुरुपयोग करता है, तो वही अधिकार उसके पतन का कारण बन जाता है।उन्होंने कहा कि जब कामदेव का विधान हुआ और उन्हें बड़ा अधिकार मिला, तो उनके भीतर अभिमान आ गया। इसी अभिमान ने उन्हें शिव की समाधि भंग करने की भूल कराई। महाराज जी ने कहा कि अभिमान वह ज्वाला है, जो व्यक्ति के विवेक को नष्ट कर देती है। इसी अभिमान के कारण दक्ष प्रजापति के मन में भी भगवान शंकर का अपमान करने का विचार उत्पन्न हुआ। महाराज जी ने कहा कि हमारे भारतीय संस्कृति में विनम्रता और...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.