भारत की परिकल्पना में चरित्र की सरलता और मानवीय मूल्य सबसे अहम: प्रो. अंबिका दत्ता शर्मा
गोरखपुर, मई 26 -- गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय दर्शनशास्त्र विभाग और मौलाना अब्दुल कलाम आजाद एशियाई अध्ययन केंद्र कोलकाता की तरफ से बृहत्तर भारत एशियाई देशों को जोड़ना विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन मंगलवार को हुआ। संगोष्ठी के दूसरे प्लेनरी सत्र के मुख्य वक्ता रहे प्रोफेसर रंजन घोष ने एक अधूरी कहानी असफलता नहीं है, बल्कि एक प्रगतिशील यात्रा है विषय पर अंततः गहन और बौद्धिक व्याख्यान प्रस्तुत किया। दूसरे प्लेनरी सत्र की अध्यक्षता प्रो. सुनीता मुर्मू ने की। संगोष्ठी के तीसरे प्लेनरी सत्र एवं विदाई सत्र में प्रो. राकेश चंद्रा ने एक राष्ट्र का निर्माण: रिचर्ड रॉर्टी के साथ श्री अरबिंदो का पठन के विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। बृहद भारत की परिकल्पना में चरित्र की सरलता और मानवीय मूल्यों के योगदान पर जो...
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