नई दिल्ली, मई 5 -- नई दिल्ली। देश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन नवाचार की प्रक्रिया को आधुनिक बनाने की जरूरत है। उक्त बातें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को भारत मंडपम में आयोजित आईआईटी मद्रास के पहले प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर कही। उन्होंने कहा कि भारत का नवाचार तंत्र एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है और अब शोध को प्रयोगशालाओं से निकलकर सीधे समाज के लिए उपयोगी उत्पादों में बदलना होगा। यह भी पढ़ें- भारत का नवाचार तंत्र एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है: धर्मेंद्र प्रधाननवाचार की आवश्यकता उन्होंने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि शोध केवल थीसिस तक सीमित न रहे, बल्कि वह वास्तविक समाधान और उत्पादों में बदले। उन्होंने बताया कि शोध एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए निजी क्षेत्र और स्टार्टअप्स हेतु लगभग एक लाख...
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