भारतीय संस्कृति में गुरुओं का सम्मान सर्वोपरि
गंगापार, अगस्त 1 -- भारतीय संस्कृति में गुरुओं को सदैव से सम्मान के योग्य माना गया, उन्हें ईश्वर से भी ऊंचा पद दिया गया है। गुरुओं की महिमा गान के अनेकों स्वर यहां सुनने को मिलते है। उक्त बातें बीआरसी फूलपुर में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के तत्वाधान में आयोजित गुरु वंदन कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राजकीय महिला महाविद्यालय परासिनपुर के प्राचार्य प्रो.राजकुमार ने कहीं। उन्होंने कहा कि गुरु शिष्य की परम्परा को अक्षुण रखने की आवश्यकता है।शिक्षकों को अपनी गरिमा स्वयं से कायम रखना होगा।विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित महासंघ के जिलाध्यक्ष कामतानाथ ने कहा कि महासंघ शिक्षकों के अधिकार, कर्तव्यों के साथ ही सामाजिक सरोकारों से भी वास्ता रखता है, इसलिए अन्य संगठनों के इतर भी रचनात्मक कार्य करता है। उन्ही कार्यों में से गुर...
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