नई दिल्ली, अप्रैल 17 -- - तीन कृषि कानून (2020-2021) : ये कानून संसद द्वारा पारित कर दिए गए थे और राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल गई थी, लेकिन भारतीय संसदीय इतिहास में यह पहली बार हुआ कि व्यापक जन-विरोध (किसान आंदोलन) के कारण सरकार को पारित कानूनों को निरस्त करना पड़ा। - भूमि अधिग्रहण (संशोधन) विधेयक, 2009: यूपीए-1 सरकार द्वारा 2007 के संशोधन विधेयक को आगे बढ़ाते हुए इसे पेश किया गया था। लेकिन 14वीं लोकसभा के भंग होने के साथ ही यह विधेयक भी समाप्त हो गया।- भूमि अधिग्रहण (संशोधन) विधेयक, 2015: मोदी सरकार ने यूपीए (यूपीए) के 2013 के कानून में संशोधन करने के लिए यह विधेयक लाया था। यह भी पढ़ें- महिला आरक्षण अधिनियम की अधिसूचना को लेकर विपक्ष हमलावर इसका उद्देश्य निजी परियोजनाओं के लिए सामाजिक प्रभाव आकलन (एसआईए) और सहमति क्लॉज को हटाना था। यह विधे...