मुजफ्फरपुर, मार्च 25 -- मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। डॉ. नामवर सिंह प्रतिगामी शक्तियों के समक्ष नतमस्तक नहीं होते थे, बल्कि तनी हुई रीढ़ के साथ खड़े होते थे। महत्वपूर्ण बात यह है कि वे ज्ञान के सामने नत और विनम्र हो जाते थे। ये बातें काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रो.आशीष त्रिपाठी ने कहीं। वे मंगलवार को एमडीडीएम कॉलेज के स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग तथा प्रगतिशील लेखक संघ के संयुक्त तत्वावधान में डॉ. नामवर सिंह की जन्मशती वर्ष के अवसर आयोजित विचार गोष्ठी में बोल रहे थे।नामवर सिंह की आलोचना-दृष्टि विषय पर आयोजित गोष्ठी में प्रो. त्रिपाठी ने कहा कि नामवर सिंह भारतीय वाचिक परंपरा के आधुनिक प्रतिनिधि थे। वे संवाद-प्रतिसंवाद में विश्वास रखते थे। कार्यक्रम का आरंभ प्राचार्य प्रो. अलका जायसवाल के स्वागत वक्तव्य से हुआ। छत्तीसगढ़ से आये वरिष्ठ पत्रक...