नई दिल्ली, जून 12 -- हरप्रीत सिंह, निशानेबाज और कोच 'जसपाल भाई' दूसरों के लिए भले एक खिलाड़ी अथवा कोच रहे, मेरे लिए घर-परिवार के सदस्य जैसे थे। उनको मैंने पहली बार तब जाना, जब मैं स्कूल में पढ़ता था। एक दिन दूरदर्शन पर खबर देखी कि स्टैंडर्ड पिस्टल प्रतिस्पर्द्धा में जसपाल राणा ने विश्व रिकॉर्ड बनाकर भारत का नाम रोशन किया है। यह देखकर मुझमें भी उनकी तरह खेलने की इच्छा जगी और पहली बार शूटिंग से मेरा रिश्ता बना। जसपाल भाई जीवित ही किंवदंती बन गए थे। जब लोग हमसे पूछा करते कि क्या करते हो और हम जवाब देते 'शूटिंग', तो पहले वे फिल्म वाली शूटिंग समझते, पर निशानेबाजी की बात कहने पर छूटते ही कहते 'जसपाल राणा वाली शूटिंग'। जसपाल भाई खेल के प्रति पूरी तरह समर्पित थे। 1994 में जब वह विश्व चैंपियनशिप खेलने गए थे, तब बीमार थे। शायद उन्हें कोई संक्रमण था...