भारतीय ज्ञान प्रणाली में आनन्दमूर्ति दर्शन की प्रासंगिकता पर मंथन
प्रयागराज, अगस्त 29 -- प्रयागराज। प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज्जू भय्या) विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग एवं रेनेसां यूनिवर्सल के संयुक्त तत्वावधान में सात दिवसीय संस्कृत उत्सव के समापन अवसर पर 'भारतीय ज्ञान प्रणाली के संदर्भ में आनन्दमूर्ति के दर्शन की प्रासंगिकता' विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित हुई। आचार्य दिव्यचेतनानन्द अवधूत ने आनन्दसूत्रम् की दार्शनिक अवधारणाओं, मन, विकास-प्रक्रिया और सृष्टि-चक्र पर प्रकाश डाला। उन्होंने संचर और प्रतिसंचर धाराओं के माध्यम से अद्वैत, द्वैत और पुनः अद्वैत की समन्वित दृष्टि समझाई। मानवतावाद से नवमानवतावाद की यात्रा तथा प्रगतिशील उपयोगिता सिद्धांत की अवधारणा भी बताई। प्रो. अनिल प्रताप गिरि ने आनन्दमूर्ति के बहुआयामी योगदान और आनन्दसूत्रम् के सात प्रमुख तत्त्वों पर विचार रखे। प्रो. आशुतोष कुमार सिंह ने विषय...
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