धनबाद, फरवरी 26 -- आईआईटी धनबाद के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा ने बुधवार को प्राचीन भारतीय ग्रंथों की प्रासंगिकता पर चर्चा करते हुए कहा कि ज्ञान का अर्थ है समझ, विज्ञान उस ज्ञान का विश्लेषण है और प्रौद्योगिकी विज्ञान का व्यावहारिक रूप है। जब विज्ञान समाज और अर्थव्यवस्था के लिए ठोस परिणाम देता है तो वही प्रौद्योगिकी बन जाता है। भारतीय ज्ञान परंपरा में थ्योरी और एप्लिकेशन का संतुलित समन्वय हमेशा से रहा है। निदेशक ने यह बातें आईआईटी आईएसएम धनबाद में बुधवार को तीन दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन एंशिएंट इंडियन टेक्स्ट साइंस एंड टेक्नोलॉजी कार्यक्रम में कहीं। डिपार्टमेंट ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज आईआईटी धनबाद और सेंटर फॉर इंडियन नॉलेज सिस्टम्स आयोजित कार्यक्रम डिपार्टमेंट ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज विभागाध्यक्ष प्रो. ज्ञान प्रकाश ने कहा ...
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