भारतीय ज्ञान परंपरा में आनन्दमूर्ति के दर्शन की प्रासंगिकता पर चर्चा
प्रयागराज, सितम्बर 22 -- प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भय्या) विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग की ओर से सात दिवसीय संस्कृत उत्सव के समापन अवसर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई। 'भारतीय ज्ञान प्रणाली के संदर्भ में श्रीश्री आनन्दमूर्ति के दर्शन की प्रासंगिकता' विषय पर वक्ताओं ने विचार रखे। रेनेसां यूनिवर्सल के केंद्रीय सचिव आचार्य दिव्यचेतनानन्द अवधूत ने आनन्दसूत्रम्, मानवतावाद, नवमानवतावाद और प्रगतिशील उपयोगिता सिद्धांत पर प्रकाश डाला। इविवि के प्रो. अनिल प्रताप गिरि ने आनन्दसूत्रम् के सात प्रमुख तत्त्वों की जानकारी दी। समापन पर विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार व प्रमाणपत्र दिए गए। संचालन डॉ. पीयूष मिश्रा ने किया।
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