एटा, मार्च 24 -- ब्रह्म देव के स्थान पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास आचार्य राकेश द्विवेदी ने भक्ति के मार्ग में आने वाली बाधाओं और उनके समाधान पर प्रकाश डाला। आचार्य ने मार्मिक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब देवर्षि नारद पृथ्वी लोक के भ्रमण पर निकले, तो उन्होंने देखा कि भक्ति रूपी स्त्री के दो पुत्र ज्ञान और वैराग्य वृद्ध अवस्था में मूर्छित पड़े हैं। नारद जी ने उन्हें जगाने के अनेक प्रयास किए, वेद-वेदांत का पाठ किया, लेकिन वे सचेत नहीं हुए। ​तभी आकाशवाणी और सनकादिक ऋषियों के परामर्श पर नारद जी को ज्ञात हुआ कि ज्ञान और वैराग्य को केवल श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से ही पुनर्जीवित किया जा सकता है जैसे ही भागवत का अमृत उन पर बरसा, वे पुन युवा और चैतन्य हो गए। ​कथा को आगे बढ़ाते हुए व्यास जी ने राजा परीक्षित को मिले सात दिन की मृत्...