सोनभद्र, अप्रैल 7 -- अनपरा,संवाददाता। धुंधकारी ने जीवनभर पाप किए और मरकर प्रेत योनि में चला गया।गोकर्ण को भाई के दुख का पता चला तो उन्होने सूर्य देव के मार्गदर्शन से सात दिन की भागवत कथा का आयोजन किया। प्रेत धुंधकारी कथा सुनने आया और सात गांठ वाले बांस के छिद्रों में बैठ गया। प्रत्येक दिन एक एक गांठ फूटती गयी और एक एक पाप खत्म होते गये। इसके पश्चात सातवें दिन वह बैकुंठ को प्रस्थित हो गया। अनपरा परियोजना आवासीय परिसर शिव मंदिर में भागवत कथा में गोकर्ण कथा का व्यास पीठ से मर्म समझाते हुए श्रीधाम वृंदावन से आये कथावाचक श्री श्याम जी उपाध्याय ने भागवत महिमा का वर्णन करते हुए भजन भागवत भगवान की है आरती ,पापियों के पाप को है तारती से प्रसंग की शुरूआत की। इस दौरान सीजीएम अनपरा अजय कुमार कटियार समेत तमाम महाप्रबन्धक एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने विधिव...
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